Saturday, 27 December 2003
Sunday, 28 September 2003
Sunday, 13 April 2003
Sunday, 17 November 2002
Saturday, 28 September 2002
Friday, 24 May 2002
Monday, 16 April 2001
“लाल परचा” – भगत सिंह और बी.के. दत्त
हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातांत्रिक सेना (सूचना)
“बहरों
को सुनाने के लिए बहुत ऊंची आवाज की आवश्यकता होती है।”, प्रसिद्ध
फ्रांसीसी अराजकतावादी शहीद बैलियाँ के यह अमर शब्द हमारे काम के औचित्य के
साक्षी हैं।
पिछले
दस वर्षों में ब्रिटिश सरकार ने शासन/सुधार के नाम पर इस देश का जो अपमान
किया है, उसकी कहानी दोहराने की आवश्यकता नहीं और ना ही हिंदुस्तानी
पार्लियामेंट पुकारी जाने वाली इस सभा ने भारतीय राष्ट्र के सिर पर पत्थर
फेंक कर उसका जो अपमान किया है, उसके उदाहरणों को याद दिलाने की आवश्यकता
है। यह सब सर्वविदित और स्पष्ट है। आज फिर जब लोग ‘साइमन कमीशन’ से कुछ
सुधारों के टुकड़ों की आशा में आंखें फैलाएं हैं और इन टुकड़ों के लोभ में
आपस में झगड़ रहे हैं। विदेशी सरकार ‘सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक’ (पब्लिक
सेफ्टी बिल) और ‘उद्योगिक विवाद विधेयक’ (ट्रेड डिस्प्यूटस बिल) के रूप में
अपने दमन को और भी कड़ा कर लेने का यतन कर रही है। इसके साथ ही आने वाले
अधिवेशन में “अखबार द्वारा राजधरोह रोकने का कानून” (प्रेस सडीशन एक्ट)
जनता पर कसने की भी धमकी दी जा रही है। सार्वजनिक काम करने वाले मजदूर
नेताओं की अंधाधुंध गिरफ्तारीयां यह स्पष्ट कर देती हैं कि सरकार किस रवैये
पर चल रही है।
राष्ट्रीय
दमन और अपमान कि इस उत्तेजना पूर्ण परिस्थिति में अपने उत्तरदायित्व की
गंभीरता को महसूस कर ‘हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातंत्र सेना’ ने अपनी सेना
को यह कदम उठाने की आज्ञा दी है। इस कार्य का प्रयोजन है कि कानून का यह
अपमानजनक प्रहसन समाप्त कर दिया जाए। विदेशी शोषक नौकरशाही जो चाहे करे,
परंतु उसकी वैधानिकता का नकाब फाड़ देना आवश्यक है।
जनता
के प्रतिनिधियों से हमारा आग्रह है कि वह इस पार्लियामेंट के पखंड को
छोड़कर अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों को लौट जाएं और जनता को विदेशी दमन और
शोषण के विरुद्ध क्रांति के लिए तैयार करें। हम विदेशी सरकार को यह बतला
देना चाहते हैं कि हम ‘सार्वजनिक सुरक्षा’ और ‘औद्योगिक विवाद’ के दमनकारी
कानूनों को, लाला लाजपत राय की हत्या के विरोध में, देश की जनता की ओर से
यह कदम उठा रहे हैं।
हम
मनुष्य के जीवन को पवित्र समझते हैं। हम ऐसे उज्जवल भविष्य में विश्वास
रखते हैं, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को पूर्ण शांति और सवतंत्रता का अवसर
मिल सके। हम इंसान का खून बहाने की अपनी विवशता पर दुखी हैं। परंतु क्रांति
द्वारा सबको सम्मान सवतंत्रता देने और मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण को
समाप्त कर देने के लिए क्रांति में कुछ ना कुछ रक्तपात अनिवार्य है।
इंकलाब जिंदाबाद
बलराज
कमांडर इन चीफ
हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातांत्रिक सेना
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